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Friday, July 12, 2019

नॉकआउट में कोहली 'किंग' नहीं, खराब है रेकॉर्ड

लंदनवनडे करियर में 236 मैच, 11286 रन, 59.40 औसत, 41 सैकड़ा और 54 हाफ सेंचुरी। क्रिकेट के एक आम जानकार के लिए भी इतने सारे स्टैट्स यह गेस करने के लिए पर्याप्त हैं कि किस खिलाड़ी का जिक्र हो रहा है। जी हां, यह टीम इंडिया के कप्तान और इस दौर के दुनिया के नंबर वन बैट्समैन के आंकड़े हैं। विराट ने हर तरह के अटैक और हर तरह की पिच व माहौल में रन बनाए हैं और अपना लोहा मनवाया है। उनका विकेट किसी भी बोलर के लिए 'प्राइज विकेट' होता है। पढ़ें: समझा जाता है कि अगर उन्हें जल्दी आउट नहीं किया गया तो वह टिककर खेलेंगे और फिर सेंचुरी बनाकर या टीम की जीत की गारंटी दिलाकर ही मैदान से लौटेंगे। ऐसे खिलाड़ी के लिए अगर यह कहा जाए कि बड़े मंच पर और नॉकआट मैचों में उसका विकेट निकालना बाएं हाथ का खेल है तो एकबारगी भरोसा नहीं होगा। मगर, आंकड़े गवाही देते हैं कि विराट के लिए मेजर टूर्नमेंट्स के नॉकआउट मैचों में अपना स्वाभाविक खेल दिखाना मुश्किल होता है। अपने करियर के तमाम बड़े नॉकआउट मैचों में वह एक हाफ सेंचुरी भी नहीं बना सके हैं। ऐसा रहा है प्रदर्शन
टूर्नमेंट विपक्षी स्कोर
2011 वर्ल्ड कप क्वॉर्टर फाइनल ऑस्ट्रेलिया 24
2011 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल पाकिस्तान 09
2011 वर्ल्ड कप फाइनल श्रीलंका 35
2015 वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल बांग्लादेश 03
2015 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल ऑस्ट्रेलिया 01
2017 चैंपियंस ट्रोफी फाइनल पाकिस्तान 05
2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल न्यू जीलैंड 01
लेफ्ट आर्म पेसर के सामने हमेशा नजर आया संकटनॉकआउट मैचों में विराट का विकेट तिलकरत्ने दिलशान से लेकर डेविड हसी तक लिया है। इन खिलाड़ियों को किसी भी तरह‘आला दर्जे’के बोलर्स में शामिल नहीं किया जा सकता। टीम इंडिया के पिछले तीन बड़े नॉकआउट मैचों पर गौर करें तो इनमें विराट लेफ्ट आर्म पेसर्स के शिकार हुआ हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुए 2015 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में विराट को मिचेल जॉनसन ने आउट किया था। तब वह 13 गेंदों पर महज 1 रन बना सके थे। पढ़ें: इसी तरह इंग्लैंड में 2017 में खेले गए चैंपियंस ट्रोफी के फाइनल में विराट पाकिस्तान के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर के शिकार बने थे। तब उन्होंने 9 गेंदों पर केवल 5 रन जोड़े थे। इस बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यू जीलैंड के लेफ्ट आर्म पेसर ट्रेंट बोल्ट ने 1 रन के निजी स्कोर पर उनको पिविलियन भेजा था। इसके पीछे हो सकती है मनोवैज्ञानिक वजह ट्रेंड और आंकड़े इस ओर संकेत करते हैं कि विराट किसी बड़े टूर्नमेंट के नॉकआउट मैचों में अपने ऊपर अतिरिक्त दिमागी प्रेशर डाल लेते हैं। इस वजह से वह अपना सहज खेल नहीं खेल पाते। मनोवैज्ञानिक वजह ही हो सकती है कि विराट एक ही तरह के बोलर के शिकार होते हैं। न्यू जीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल के बाद विराट से तरह की नाकामियों के बारे में जिक्र किया गया तो उनका कहना था कि कोई भी खिलाड़ी बड़े मौके पर अपना बेस्ट देना चाहता है। ऐसा नहीं होने पर निश्चित तौर पर उसे निराशा होती है। जाहिर है इस निराशा से उबरने और बिग टूर्नमेंट्स में अपने प्रदर्शन को सुधारने के लिए विराट को अब लंबा इंतजार करना पड़ेगा।


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