लंदन वर्ल्ड कप टूर्नमेंट के इंग्लैंड और न्यू जीलैंड के बीच हुए फाइनल मैच में पहली गेंद से 612वीं तक तमाम उतार-चढ़ाव देखने को मिले। बावजूद इसके दोनों टीमों के एक बराबर रन थे। एक को विजेता घोषित करना था इसलिए आईसीसी ने उस रूल का सहारा लिया जो कहता है कि वर्ल्ड कप का फाइनल अगर टाई हो जाता है तो सुपरओवर खेला जाएगा। अगर सुपरओवर भी बराबरी पर छूटा तो फिर यह देखा जाएगा कि किस टीम ने ज्यादा बाउंड्रीज (फोर और सिक्स) लगाई हैं। पहले 50 के अलावा सुपर ओवर में लगाई गई बाउंड्रीज भी जोड़ी जाएंगी। इस रूल से इंग्लैंड 17 के मुकाबले 26 बाउंड्रीज से वर्ल्ड कप तो जीत गया लेकिन टूर्नमेंट के इतिहास में पहली बार इस्तेमाल हुए इस रूल पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। क्रिकेट के दिग्गजों के अलावा एक आम क्रिकेट-प्रेमी को भी लगता है कि न्यू जीलैंड के साथ ‘ठगी’हुई है। पढ़ें- बाउंड्री काउंट के क्या हो सकते हैं विकल्प वैसे लगता तो नहीं कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नमेंट में फिर से बाउंड्री रूल से चैंपियन का फैसला होगा। बावजूद इसके जब रूल पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो आईसीसी को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आखिर क्या हो सकते हैं इस नियम के विकल्प? 1- डबल सुपर ओवर से हो फैसला: एक सुपर ओवर से फैसला नहीं होता तो दूसरे सुपर ओवर का सहारा लिया जा सकता है। जैसे कि फुटबॉल में पेनल्टी शूटआउट के बाद सडन डेथ का सहारा लिया जाता है। पढ़ें- 2- कम विकेट गंवाने वाले को अडवांटेज: अगर 50 ओवर खत्म होने के बाद दोनों टीमों के स्कोर बराबर हों तो ऐसी स्थिति में अडवांटेज उस टीम को मिले जिसने अपनी इनिंग्स में कम विकेट गंवाए हों। जैसे न्यू जीलैंड ने 8 विकेट पर 241रन बनाए थे जबकि इंग्लैंड की टीम 50 ओवर में 241 रन बनाकर ऑलआउट हो गई थी। 3-जॉइंट विनर घोषित हों: अगर निर्धारित 50 ओवर और डबल सुपर ओवर के बावजूद टीमें बराबरी पर हों तो फिर दोनों टीमों को संयुक्त विजेता घोषित किया जा सकता है।
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